Anonymous On Sunday, October 31, 2010

Few lines written by me dedicated to the great souls of my Great Grandfather Chaudhary Shishram Dahiya, Shaheed-e-Azam Bhagat Singh, Chandra Shekhar Azad, Subhash Chandra Bose, Brig. Hoshiar Singh Rathee and all the martyrs and revolutionaries of Indian Freedom Movement and to the soldiers of Indian Army.

शहीद

"आज फिर वो रात आई है,
शहीदों का पैगाम साथ लायी है,
लिखा है उन वीरों ने मेरे लिए,
बताया है की आज फिर वतन के लिए मर मिटने की घडी लौट आई है,
इसी दिन का तो मुझे इंतज़ार था,
इसी वक़्त पे तो मुझे ऐतबार था,
अब धरती माँ के लिए कुछ करने की मेरी है बारी,
ऐ वतन तेरी मेरी पुरानी है ये यारी.

तू ना रोना मेरे लिए,
आँखों में आंसूं न भरना,
अभी न रोक तू मुझे, देश के लिए कुछ काम है करना.

शहीद कभी मरते नही,
जिंदा रहते हैं वह इन हवाओं में,
पैदा होते हैं फिर कुछ बड़ा करने के लिए,
मिल जाते हैं सबको इस देश की राहों में.

मुझे भरोसा है मेरा जज्बा विफल नही जायेगा,
फिर कोई आज़ादी का मस्ताना मेरी राहों पे आएगा."
Author: Harsh Dahiya
लेखक: हर्ष दहिया

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